रिपोर्ट : LegendNews
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद का दावा, ताहिर को मुस्लिम होने के कारण दोषी ठहराया
2020 के दिल्ली दंगों के दौरान आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में पूर्व आप पार्षद ताहिर हुसैन को दोषी ठहराए जाने के बाद राजनीतिक घमासान तेज है। कांग्रेस के लोकसभा सांसद इमरान मसूद ने दावा किया कि ताहिर हुसैन को उनके मुस्लिम होने की वजह से निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा, 'अगर उनका नाम ताहिर की जगह कपिल होता तो उन्हें बरी कर दिया जाता।' इस बयान के बाद बीजेपी ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोल दिया।
इमरान मसूद के बयान पर बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव भाटिया ने सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या यह कांग्रेस नेतृत्व की आधिकारिक सोच है। उन्होंने कहा, 'क्या यह बयान राहुल गांधी के निर्देश पर दिया गया? क्या राहुल गांधी इमरान मसूद से इस बयान पर माफी मंगवाएंगे?' बीजेपी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस न्यायिक फैसले पर धर्म का रंग चढ़ाने की कोशिश कर रही है।
कड़कड़डूमा कोर्ट ने सुनाया अहम फैसला
दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट के अतिरिक्त सत्र जज प्रवीण सिंह ने ताहिर हुसैन को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या), 153ए, 147, 148, 149, 365 और 188 के तहत दोषी करार दिया। हालांकि अदालत ने उन्हें धारा 120बी (आपराधिक साजिश) और धारा 129 के आरोपों से बरी कर दिया।
4 और दोषी, 6 आरोपियों को मिली राहत
अदालत ने इस मामले में ताहिर हुसैन के अलावा नाजिम, कासिम, जावेद और अनस को भी दोषी ठहराया। वहीं, 6 अन्य आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया। इस फैसले को 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े सबसे चर्चित मामलों में एक अहम न्यायिक निर्णय माना जा रहा है।
51 चोटों के साथ नाले से मिला था अंकित शर्मा का शव
अभियोजन के अनुसार 25 फरवरी 2020 को आईबी अधिकारी अंकित शर्मा घर से किराने का सामान लेने निकले थे, जिसके बाद वह लापता हो गए। बाद में उनका शव चांदबाग पुलिया के पास एक नाले से बरामद हुआ। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उनके शरीर पर धारदार हथियार और कुंद वस्तुओं से किए गए 51 गंभीर चोटों के निशान पाए गए थे।
सालों से जो कहा, अदालत ने उस पर मुहर लगाई
फैसले के बाद बीजेपी नेता कपिल मिश्रा ने कहा कि अदालत का निर्णय उन दावों की पुष्टि करता है जो वह वर्षों से करते आ रहे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि अंकित शर्मा की हत्या पहले से सुनियोजित थी और ताहिर हुसैन के आम आदमी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से करीबी संबंध थे। फैसले के बाद इस मामले को लेकर सियासी बयानबाजी और तेज हो गई है।
-Legend News

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