ईरान के युद्धग्रस्त होर्मुज स्ट्रेट से गुजर कर तिरंगे वाला पहली भारतीय जहाज 'शिवालिक' गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह पहुंच चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान के बीच हुई बातचीत के बाद 'शिवालिक' एलपीजी टैंकर पहला जहाज है, जिसे ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने दिया।
इसके बाद एलपीजी टैंकर 'नंदा देवी' को भी ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने की अनुमति दी। हालांकि, भारतीय झंडे वाला तीसरा जहाज जो 'नंदा देवी' के पीछे-पीछे भारत की ओर शान से बढ़ता चला आ रहा है, वह एक तेल टैंकर 'जग लाडकी' है। 
'जग लाडकी' पर लोडिंग के दौरान फुजैराह में अटैक
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की ओर से जारी प्रेस रिलीज में कहा गया है,'14 मार्च, 2026 को जब भारतीय झंडे वाला जहाज 'जग लाडकी', फुजैराह सिंगल प्वाइंट मूरिंग में कच्चा तेल लोड कर रहा था, तब फुजैराह तेल टर्मिनल पर अटैक हुआ।' 
80,800 मीट्रिक टन मुरबान क्रूड ऑयल लेकर आ रहा
प्रेस रिलीज के अनुसार 'जहाज रविवार को 10.30 बजे फुजैराह से सुरक्षित निकल गया। इसपर 80,800 मीट्रिक टन मुरबान क्रूड ऑयल लदा है और भारत आ रहा है। जहाज और जहाज पर मौजूद भारतीय नाविक सुरक्षित हैं।' मुरबान क्रूड ऑयल बहुत ही उच्च श्रेणी का कच्चा तेल है।
'शिवालिक' मुंद्रा पोर्ट पहुंचा, 'नंदा देवी' कांडला पहुंचेगा
इससे पहले शनिवार को भारतीय झंडे वाले दो एलपीजी कैरियर 'शिवालिक और नंदा देवी' ने जोखिमों से भरे होर्मुज स्ट्रेट को क्रॉस किया, जिनमें से 'शिवालिक' मुंद्रा पोर्ट पहुंच भी चुका है और 'नंदा देवी' के मंगलवार को गुजरात में ही कांडला बंदरगाह पहुंचने की योजना है। दोनों टैंकरों पर लगभग 92,712 मीट्रिक टन एलपीजी लदे हैं।
भारत की कूटनीति से फारस की खाड़ी से निकल रहे जहाज
इसके बाद फारस की खाड़ी के पश्चिमी क्षेत्र में भारतीय झंडे वाले 22 जहाज बच गए हैं, जिनपर 611 नाविक सवार हैं। मंत्रालय के मुताबिक ये जहाज और नाविक डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ शिपिंग की निगरानी में हैं। यह भारत की कूटनीति का परिणाम है कि धीरे-धीरे पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच भारतीय जहाजों को एक-एक करके सुरक्षित निकलने का मौका मिल रहा है।
पश्चिम एशिया में युद्धग्रस्त क्षेत्र से निकलकर भारत आए जहाज
ईरान और अमेरिका-इजरायल युद्ध के बाद भारत पहुंचने वाला सबसे पहला जहाज शेनलॉन्ग स्वेजमैक्स लाइबेरिया का था, जो खाड़ी से कच्चा तेल लेकर मुंबई बंदरगाह पहुंचा।
इसके साथ खतरा यह था कि इसने होर्मुज स्ट्रेट पार करने के लिए डार्क ट्रांजिट का सहारा लिया।
ईरान के साथ बातचीत के बाद जिस जहाज को सबसे पहले होर्मुज से सुरक्षित गुजरने की अनुमति मिली वह एलपीजी टैंकर 'शिवालिक' है।
इसके बाद एलपीजी टैंकर'नंदा देवी' भी उसी रास्ते बाकायदा आधिकारिक अनुमति से निकल कर बेधड़क लहराते हुए तिरंगे के साथ भारत की ओर बढ़ रहा है।
तीसरा तेल टैंकर 'जग लाडकी' है, जिसने ओमान की खाड़ी से गुजरते हुए हर तरह के खतर के बीच भारत की ओर बढ़ने का दम दिखाया है।
अंतरराष्ट्रीय समुद्री जल मार्ग में आने के बाद इन सभी भारतीय जहाजों को भारतीय नौ सेना के युद्धपोत एस्कॉर्ट करके भारत ला रहे हैं। 
-Legend News

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