देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस पर ऐतिहासिक लाल किले से राष्ट्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट किया कि 21वीं सदी में भारत की संप्रभुता और आर्थिक सुरक्षा का सीधा संबंध ऊर्जा और आधुनिक खनिजों की आत्मनिर्भरता से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि आज के दौर में वैश्वीकरण पर चर्चाएं थमने लगी हैं क्योंकि दुनिया भर में आवश्यक संसाधनों का खुलेआम हथियारीकरण किया जा रहा है।
ऐसे में भारत को रक्षा, डिजिटल तकनीक, ऑटोमोबाइल और क्लीन एनर्जी के क्षेत्र में आगे ले जाने के लिए रणनीतिक खनिजों का सुरक्षित भंडार सुनिश्चित करना अनिवार्य हो गया है।
संसाधनों के हथियारीकरण के बीच क्रिटिकल मिनरल कॉरिडोर
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में आगाह किया कि आज न केवल पेट्रोलियम, उर्वरक और दवाइयों का, बल्कि विभिन्न भू-भागों और आपूर्ति श्रृंखलाओं का भी हथियारीकरण होने लगा है। इस वैश्विक संकट से निपटने के लिए भारत ने क्रिटिकल मिनरल कॉरिडोर और नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन की शुरुआत की है।
मौजूदा समय में रेयर अर्थ मिनरल्स के वैश्विक उत्पादन और सप्लाई पर 90 फीसदी से ज्यादा नियंत्रण चीन का है। इस एकतरफा निर्भरता को समाप्त करने के लिए भारत ने ऑस्ट्रेलिया सहित दुनिया के कई प्रमुख देशों के साथ महत्वपूर्ण रणनीतिक समझौते (Deals) किए हैं, और अब वैश्विक समुदाय क्रिटिकल मिनरल्स के मामले में भारत को एक विश्वसनीय साझेदार के रूप में देख रहा है।
सेमीकंडक्टर चिप उत्पादन में छलांग, अगले 8 वर्षों में बनेंगे 5 से 8 नए प्लांट
आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑटोमेशन की रीढ़ माने जाने वाले सेमीकंडक्टर पर बोलते हुए पीएम मोदी ने कहा कि चिप के बिना आज पूरी दुनिया ठप हो सकती है। आजादी के समय जब वैश्विक स्तर पर सेमीकंडक्टर तकनीक आई थी, तब भारत में इस पर केवल चर्चाएं ही होती रहीं और ठोस कदम नहीं उठाए गए। लेकिन अब भारत में घरेलू सेमीकंडक्टर प्लांट तैयार होकर चिप उत्पादन शुरू कर चुके हैं।
उन्होंने घोषणा की कि आने वाले 7 से 8 वर्षों के भीतर देश में 5 से 8 नए अत्याधुनिक सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग प्लांट पूरी तरह क्रियान्वित हो जाएंगे, जिससे चिप आयात पर भारत की निर्भरता नगण्य हो जाएगी।
'नो गो सी' से 'गो सी' की ओर: ₹85,000 करोड़ का समुद्र मंथन प्रोजेक्ट
ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए प्रधानमंत्री ने बताया कि देश हमेशा केवल कच्चे तेल के आयात पर निर्भर नहीं रह सकता। पहले जहां समुद्री तट के 99% हिस्से को 'नो-गो एरिया' मानकर अन्वेषण से दूर रखा गया था, वहीं अब भारत 'नो गो सी' से 'गो सी' की नीति पर आगे बढ़ चुका है। गहरे समुद्र से ऊर्जा, गैस और दुर्लभ समुद्री खनिजों को निकालने के लिए केंद्र  सरकार ने 85,000 करोड़ रुपये के आवंटन के साथ 'समुद्र मंथन' परियोजना को आगे बढ़ाया है।
सौर ऊर्जा में 160 GW की उछाल और 2047 तक 100 GW परमाणु बिजली
प्रधानमंत्री ने ऊर्जा परिवर्तन के आंकड़ों का ब्योरा देते हुए बताया कि 12 वर्ष पहले देश में सौर ऊर्जा की स्थापित क्षमता मात्र 2 गीगावॉट थी, जो आज बढ़कर 160 गीगावॉट के पार पहुंच चुकी है। भविष्य की भारी बिजली मांग, डेटा सेंटर्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए भारत वर्ष 2047 तक 100 गीगावॉट परमाणु ऊर्जा उत्पादन का मजबूत लक्ष्य लेकर काम कर रहा है। 
-Legend News

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