RJD सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के लिए अदालत से बुरी खबर आई है। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने लालू प्रसाद यादव पर IRCTC मनी लॉन्ड्रिंग केस में आरोप तय करने के आदेश दे दिए हैं। इसके अलावा अदालत ने कुछ बड़ी टिप्पणियां भी की हैं। जाहिर है कि आने वाले दिन लालू प्रसाद यादव के लिए मुश्किल भरे साबित हो सकते हैं। 
लालू-राबड़ी और तेजस्वी यादव पर आरोप तय करने के आदेश
आईआरसीटीसी होटल से जुड़े प्रवर्तन निदेशालय के मामले में दिल्ली की अदालत ने राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव, लारा प्रोजेक्ट्स और चार अन्य के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया है। इस आदेश के बाद लालू परिवार की मुश्किलें बढ़नी तय हो गई हैं।
कोर्ट की टिप्पणी
अदालत ने इस दौरान टिप्पणी की कि पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद पर पद के दुरुपयोग का संदेह जाता है। अदालत ने ये भी कहा कि रेलवे अधिकारियों ने रांची और पुणे में पट्टा देने के लिए लालू प्रसाद यादव के कहने पर निविदा में हेर-फेर की। अदालत ने इन टिप्पणियों के साथ लालू प्रसाद यादव, पूर्व सीएम राबड़ी देवी, बिहार में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव और 5 अन्य के खिलाफ आरोप तय करने के आदेश दे दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 3 अक्टूबर को होगी। 
इन लोगों पर आरोप तय करने के आदेश
विशेष न्यायाधीश (पीसी एक्ट) विशाल गोगने ने लालू प्रसाद यादव, तेजस्वी यादव, राबड़ी देवी, सरला गुप्ता, लारा प्रोजेक्ट्स एलएलपी, सुजाता होटल्स और अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा नहीं लगता कि लालू प्रसाद यादव के खिलाफ की गई जांच राजनीतिक रूप से प्रभावित थी। अदालत ने यह भी कहा कि लारा प्रोजेक्ट्स को जिस तरह कथित लाभ मिला, उससे लालू यादव की भूमिका पर संदेह पैदा होता है। 
2025 में सीबीआई के केस में भी किए गए थे आरोप तय
इससे पहले 13 अक्टूबर 2025 को इसी अदालत ने सीबीआई के मामले में लालू यादव के खिलाफ भ्रष्टाचार, आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी समेत विभिन्न धाराओं के तहत आरोप तय किए थे। राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव पर भी आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी सहित कई आरोप तय किए गए थे। सीबीआई का आरोप है कि वर्ष 2004 से 2009 के बीच रेल मंत्री रहते हुए लालू यादव ने आईआरसीटीसी के रांची और पुरी स्थित दो होटलों का संचालन सुजाता होटल्स को कथित तौर पर हेरफेर वाले टेंडर के जरिए लीज पर दिया। इसके बदले करोड़ों रुपये मूल्य की जमीन बाजार मूल्य से काफी कम कीमत पर एक ऐसी कंपनी को हस्तांतरित की गई, जिसका संबंध राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव से बताया गया। 
CBI की FIR के आधार पर ED ने दर्ज किया था केस
सीबीआई की एफआईआर के आधार पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बाद में पीएमएलए के तहत मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया था। यादव परिवार लगातार इस मामले को राजनीतिक साजिश करार देता रहा है और उसका कहना है कि उनके खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं है। मामले में सीबीआई की ओर से विशेष लोक अभियोजक डी.पी. सिंह, जबकि लालू यादव और उनके परिवार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मनींदर सिंह और अन्य वकीलों ने पैरवी की। 
-Legend News

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