रिपोर्ट : LegendNews
पीओके के प्रदर्शनकारी नेता ने पाक मीडिया को बताया हीरामंडी की नाजायज औलाद
पीओके के प्रदर्शनकारी नेता सरदार अम्मान खान ने पाकिस्तानी मीडिया को 'हीरामंडी की नाजायज औलाद' कहा है। पाकिस्तान की सेना के हाथ से पीओके का कंट्रोल तेजी से निकलता जा रहा है। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर-पीओके में नागरिकों का प्रदर्शन काफी तेज हो चुका है। प्रदर्शनकारियों के प्रमुख नेता सरदार अम्मान खान ने पाकिस्तानी सुरक्षा बलों को रावलकोट शहर तुरंत खाली करने का सीधा अल्टीमेटम दिया है।ईदगाह ग्राउंड में लोगों की भारी भीड़ को संबोधित करते हुए 'जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी' (JAAC) ने पाकिस्तानी सेना को शहर से तत्काल निकलने को कहा है। पीओके के नेताओं में पाकिस्तान की मीडिया की तरफ से फैलाए जा रहे प्रोपेगेंडा और निगेटिव रिपोर्टिंग की निंदा की है। पाकिस्तानी मीडिया लगातार प्रदर्शनकारियों को 'आतंकवादी' बता रही है और पाकिस्तान जो 'कश्मीर की आजादी के लिए आंदोलन' चला रहा है उसके लिए खतरा बताया है।
पीओके में पाकिस्तान के खिलाफ फूटा गुस्सा
JAAC के नेता सरदार अम्मान खान ने पाकिस्तानी मीडिया को जमीनी हकीकत से पूरी तरह कटा हुआ बताया और कैमरे पर तीखे शब्दों में उन्हें 'हीरा मंडी की नाजायज औलाद' कहा। सरदार अम्मान खान ने आरोप लगाया कि पीओके की स्थानीय सरकार पाकिस्तानी शासन की कठपुतली है और पाकिस्तानी सेना को उसने विदेशी ताकतों के इशारे पर नाचने वाली कठपुतली बताया। उन्होंने कहा कि 'पाकिस्तानी सेना का असली बाप अमेरिका है।'
पाकिस्तान के प्रॉक्सी नेटवर्क के ढांचे में दरार
शीर्ष खुफिया सूत्रों से मिली खास जानकारी के अनुसार यह अभूतपूर्व आंतरिक विद्रोह पाकिस्तान के आर्थिक और सुरक्षा ढांचे में आई गहरी दरार को दिखाता है। जो विरोध शुरू में बेतहाशा महंगाई, बिजली के गलत बिल और गेहूं पर मिलने वाली जरूरी सब्सिडी अचानक खत्म करने के खिलाफ स्थानीय स्तर पर शुरू हुआ था वह अब बड़े पैमाने पर फैल चुका है। JAAC ने इन गंभीर आर्थिक शिकायतों का पूरा फायदा उठाया है और उन्हें इस्लामाबाद के संवैधानिक अधिकार को पूरी तरह और व्यापक रूप से नकारने में बदल दिया है।
खुफिया विभाग के बड़े सूत्रों ने कहा है कि रावलपिंडी ने हमेशा से इस कब्जे वाले इलाके का इस्तेमाल कट्टरपंथी प्रॉक्सी समूहों के लिए एक सुरक्षित अड्डे के तौर पर किया है। उन्होंने जैश-ए-मोहम्मद जैसे प्रतिबंधित संगठनों को रावलकोट की सड़कों पर खुलेआम हथियारबंद रैलियां करने की इजाजत भी दी है। आज आर्थिक तंगी से जूझ रहा यह देश उन्हीं हथियारों का इस्तेमाल शांतिप्रिय स्थानीय नागरिकों के खिलाफ कर रहा है और साथ ही नागरिक अधिकार कार्यकर्ताओं को बेतुके ढंग से आतंकवादी करार दे रहा है।
-Legend News

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