आगरा। राजस्थान सरकार ने आगरा, मथुरा, प्रयागराज और वाराणसी में जयपुर रियासत की संपत्तियों का मालिकाना हक मांगा है. इसमें आगरा की जयपुर हाउस कॉलोनी का क्षेत्र शामिल हैं. प्रदेश सरकार ने प्रयागराज, वाराणसी और मथुरा के जिलाधिकारियों को भी निर्देश जारी किए हैं.

राजस्थान सरकार के मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने यूपी सरकार को पत्र भेजा है. इसको लेकर ही उत्तर प्रदेश राजस्व परिषद के आयुक्त ने चारों जिलों के जिलाधिकारी से रिपोर्ट तलब की है.

राजस्थान सरकार ने दावा 1952 में हुए ऐतिहासिक विलय समझौते के आर्टिकल 6 (2) सी के आधार पर किया है. जिसमें यह प्रावधान है कि पूर्ववर्ती जयपुर रियासत की जो संपत्तियां राज्य के बाहर स्थित हैं. उन सभी संपत्तियों पर राजस्थान राज्य सरकार का अधिकार होगा.

जिला प्रशासन को प्रदेश सरकार से मिले राजस्थान के मुख्य सचिव के पत्र के साथ ही 16 फरवरी 1952 का राजपत्र भी मिला है.जिसमें आगरा सहित प्रदेश के अन्य शहरों स्थित जयपुर रियासत की संपत्तियों का ब्योरा दर्ज है.

इसमें आगरा के जयपुर हाउस क्षेत्र में दो ऐतिहासिक कोठियां, करीब 100 बीघा जमीन ऐतिहासिक सदाशिव मन:कामेश्वर मंदिर से जुड़ा क्षेत्र तथा सड़क की एक प्रमुख पट्टी शामिल है.

बता दें कि उत्तर प्रदेश के राजस्व विभाग ने त्वरित कार्रवाई करके आगरा जिलाधिकारी को पत्र लिखकर वस्तुस्थिति की विस्तृत रिपोर्ट मांगी.

जिलाधिकारी मनीष बंसल ने इसके बाद नगर आयुक्त, विकास प्राधिकरण के सचिव और एसडीएम सदर को जमीन और भवनों के पुराने रिकॉर्ड खंगालकर रिपोर्ट तलब की है.

इससे अब नगर निगम, आगरा विकास प्राधिकरण और तहसील स्तर की टीमें ब्रिटिश कालीन और आजादी के बाद के पुराने अभिलेखों का खंगाल रही हैं.

इसमें पिछले 70 वर्षों में इनमें से कितनी संपत्तियों की बिक्री हो चुकी है, कितने हिस्सों पर निजी या सरकारी निर्माण हो चुके हैं. वर्तमान में उनका भू-उपयोग क्या है.

एक कोठी में चल रहा जीएसटी कार्यालय

जयपुर हाउस में राजपरिवार की दो कोठियां बताई जा रही हैं. एक ब्रिटिश कालोनी वास्तुशिल्प से बनी है. इन कोठी के मुख्य प्रवेश द्वार के बाद भव्य पोर्टिको बना हुआ है. उसके सामने एक खूबसूरत बगीचा है.

इसके बीच फव्वारा है. जो रियासत कालीन समय में कोठी को भव्यता प्रदान करता था. कोठी के अंदर काफी खाली जमीन थी. पीछे के हिस्से में खाली ज़मीन थी, लेकिन कालांतर में इस कोठी में सेल टैक्स और अब अब जीएसटी का कार्यालय है. सरकार ने कोठी के पीछे के हिस्से में नया निर्माण कराया है.

एक भवन में संचालित है एडीए का दफ्तर

जयपुर हाउस के दूसरे भवन में आगरा विकास प्राधिकरण का कार्यालय संचालित है. जो भवन राजपूताना शैली में बना था. यह लाल पत्थर से बना और इसमें ऊंची-ऊंची मेहराबें बनी हैं. मुख्य भवन में चार विशाल कमरे थे.

इस भवन में अस्तबल और हाथी खाना भी हुआ करता था. विकास प्राधिकरण का कार्यालय भी पहले मुख्य इमारत में संचालित था. इसके पीछे बने कमरों में भी कार्यालय बना दिए गए थे. धीरे-धीरे परिसर की खाली जमीन पर भी कार्यालय बना दिए हैं.

राजस्व टीम खंगालेगी रिकॉर्ड

एसडीएम सदर विक्रम सिंह राघव ने बताया कि पूर्व रियासत जयपुर की संपत्तियों के संबंध में जयपुर हाउस से जुड़े राजस्व अभिलेख दिखवाए जाएंगे. मौके पर राजस्व टीम भेजकर जानकारी ली जाएगी. जिसकी रिपोर्ट बनाकर उच्चाधिकारियों को भेजी जाएगी.

डीएम को भेजी जाएगी संयुक्त रिपोर्ट

सहायक नगरायुक्त श्रद्धा पांडेय ने बताया कि राजस्थान सरकार के पत्र के आधार पर शासन की ओर से पत्र मिला है. जयपुर हाउस और उसके आसपास की संपत्तियों के विषय में ब्रिटिश कॉलोनी और आजादी के बाद दस्तावेजों को खंगाले जा रहे हैं. इसके बाद संयुक्त रिपोर्ट डीएम को सौंपी जाएगी.

शासन को भेजी जाएगी रिपोर्ट

एडीएम प्रशासन आजाद भगत सिंह ने बताया कि राजस्थान सरकार की ओर से जयपुर हाउस की पूर्व रियासत की संपत्तियों के अधिकार को लेकर उत्तर प्रदेश शासन से जानकारी मांगी है. इस संबंध में एडीए और नगर निगम को पत्र लिखकर अभिलेख मांगे हैं. जिसके आधार पर आधार पर शासन को रिपोर्ट भेजी जाएगी.

दूसरे शहरों की संपत्तियों पर भी दावा

राजस्थान सरकार ने आगरा के साथ ही अलावा मथुरा, प्रयागराज और वाराणसी में स्थित संपत्तियों पर भी दावा किया है. मथुरा के जसवंतगंज धर्मशाला परिसर में 2.16 एकड़ भूमि पर बनी 6 कोठरियां रियासत की संपत्तियों की सूची में शामिल हैं.

प्रयागराज के कटरा सवाई जयसिंह इलाके में 35.25 एकड़ जमीन जयपुर रियासत के नाम दर्ज बताई जा रही है. धार्मिक नगरी वाराणसी के मोहल्ला मान मंदिर में 44 मकान तथा प्रसिद्ध मानमंदिर घाट का मालिकाना हक भी रियासत से जुड़ा बताया गया है. प्रदेश सरकार ने प्रयागराज, वाराणसी और मथुरा के जिलाधिकारियों को भी निर्देश जारी किए हैं.

- Legend News

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