मथुरा। उत्तर प्रदेश शासन द्वारा प्रस्तावित उत्तर प्रदेश अन्तर्देशीय जलयान नियमावली-2026 के प्रारूप के संबंध में आज कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह जी की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण प्रस्तुतीकरण एवं विचार-विमर्श बैठक आयोजित की गई। 

बैठक का उद्देश्य जनपद स्तर पर प्रस्तावित नियमावली के विभिन्न प्रावधानों से संबंधित अधिकारियों को अवगत कराना तथा उसके प्रभावी क्रियान्वयन के संबंध में सुझाव प्राप्त करना था। बैठक में जनपद के विभिन्न क्षेत्रों के नाविकों द्वारा भी प्रतिभाग किया गया तथा अपने-अपने सुझाव प्रस्तुत किए गए। बैठक में अन्तर्देशीय जल परिवहन, नौकायन संचालन, यात्री सुरक्षा, लाइसेंसिंग व्यवस्था, आपदा प्रबंधन, जलमार्गों के सुरक्षित संचालन, पर्यावरण संरक्षण तथा विभिन्न विभागों के मध्य समन्वय जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया गया।

बैठक के दौरान अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि जनपद में संचालित समस्त नौकाओं एवं नाविकों का नियमानुसार पंजीकरण, आवश्यक सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता, निर्धारित मानकों का अनुपालन तथा यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु प्रभावी कार्यवाही की जाए। साथ ही संबंधित विभागों को शासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुरूप समन्वय स्थापित करते हुए आवश्यक तैयारियाँ पूर्ण करने के निर्देश दिए गए।

 बैठक में विभिन्न विभागों के अधिकारियों द्वारा नियमावली के प्रारूप पर अपने सुझाव एवं विचार भी प्रस्तुत किए गए, जिन्हें शासन स्तर पर प्रेषित किए जाने हेतु संकलित किया गया।

प्रशासन द्वारा स्पष्ट किया गया कि प्रस्तावित नियमावली लागू होने के उपरांत अन्तर्देशीय जल परिवहन व्यवस्था को अधिक सुरक्षित, सुव्यवस्थित एवं पारदर्शी बनाया जा सकेगा, जिससे आमजन को सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण सेवाएँ उपलब्ध होंगी।

जिलाधिकारी चन्द्र प्रकाश सिंह ने कहा कि जनपद मथुरा यमुना नदी तटवर्ती क्षेत्र होने के कारण जलजनित आपदाओं की दृष्टि से संवेदनशील है। ऐसे में नाविकों एवं गोताखोरों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्होंने कहा कि नाविकों की सुरक्षा, नावों के संचालन, श्रद्धालुओं की सुविधा, आपदा की स्थिति में त्वरित एवं प्रभावी राहत एवं बचाव कार्य आदि हेतु नियमावली आवश्यक है। 

जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह ने सभी नाविकों को सुरक्षा मानकों के अनुरूप नाव/ स्टीमर के संचालन हेतु निर्देशित किया गया। उन्होंने कहा कि अपने फोन में दामिनी व सचेत ऐप डाउनलोड करें। नाविक अपनी नाव में प्राथमिक स्वास्थ्य किट, लाइफ वाय व अन्य सुरक्षा उपकरण रखें। सभी नाविक वैध पहचान पत्र व लाइसेन्स अवश्य रखें। लाइफ जैकेट सभी के लिए अनिवार्य है (नाविक एवं यात्री)। सुरक्षा को लेकर यात्रियों को ब्रीफ करें। नाव का रख-रखाव करें। तैरने वाले उपकरण साथ लें। आपदा संकेत संबंधी उपकरण साथ लें। मौसम संबंधी जानकारी लेते रहें। ज्वलनशील वस्तु को सुरक्षित जगह रखें। अन्य नावों पर नजर रखें। संचार उपकरण साथ लेकर चलें।

जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह ने सभी नाविकों से अनुरोध किया कि नाव पर अधिक भार न होने दें, नाव में पशुओं के साथ यात्रियों को न बैठाएं, नशे का सेवन न करें, क्षमता से अधिक यात्री न बिठायें, खराब मौसम अथवा तेज हवाओं में नाव का उपयोग न करें, नाव में जल्दबाजी न करें, प्रतिबंधित क्षेत्रों में नाव न ले जाए तथा अधिक तेज़ गति में नाव न चलाए। जिलाधिकारी नियमावली में नाविकों एवं यात्रियों हेतु बीमा की सुविधा को जोड़ने हेतु आग्रह किया गया उन्होंने कहा कि नाविकों एवं गोताखोर के हितों के लिए नियामवली बनाई जा रही है, जिससे सभी की सुरक्षा की जा सके। उन्होंने नाविकों से कहा कि यात्रियों, अतिथियों एवं आगंतुकों की सुरक्षा आपकी प्राथमिकता होनी चाहिए।

बैठक में जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह, अपर परिवहन आयुक्त प्रशासन श्रीमती चित्रलेखा सिंह, अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व डॉ0 पंकज कुमार वर्मा, अपर जिलाधिकारी नमामि गंगे नंद प्रकाश मौर्या, अपर नगर आयुक्त सी0पी0 पाठक, जिला विकास अधिकारी गरिमा खरे, सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी प्रशासन नीतू सिंह, जिला आपदा विशेषज्ञ पूजा राणा सहित विभिन्न नाविकों द्वारा बैठक में प्रतिभाग किया गया।
- Legend News

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